FCRA Bill 2026: विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण नहीं, भारत के राष्ट्रीय हित की सुरक्षा
बल्कि तथ्यों और परिणामों से भी सवाल पूछती है। कानून का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन कानून को गलत धार्मिक रंग देना सामाजिक जिम्मेदारी नहीं है। यदि किसी प्रावधान पर वास्तविक आपत्ति है तो संसद में बहस होनी चाहिए। विशेषज्ञों की राय ली जानी चाहिए। आवश्यक हो तो Joint Parliamentary Committee को भेजा जा सकता है। लेकिन समाज को धर्म के आधार पर बांटना समाधान नहीं है। भारत की संप्रभुता सर्वोपरि विदेशी सहायता से अस्पताल, शिक्षा, गरीबों की सहायता, आपदा राहत और अनेक सामाजिक कार्य हो सकते हैं। ऐसे वास्तविक और ईमानदार सामाजिक कार्यों का सम्मान होना चाहिए। लेकिन विदेशी धन के साथ विदेशी प्रभाव का प्रश्न भी उठ सकता है। इसलिए किसी भी संप्रभु देश को यह अधिकार है कि वह तय करे कि उसके यहां विदेशी योगदान किन नियमों के अंतर्गत स्वीकार और उपयोग किया जाएगा। भारत भी यही कर रहा है। यह किसी धर्म, भाषा या समुदाय का प्रश्न नहीं है। यह प्रश्न है— क्या भारत अपने कानून स्वयं बनाएगा? क्या भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा? क्या भारत विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा? इन तीनों प्रश्न...